शादी की रस्में खत्म होते ही राजेश ने दुर्गा को अपनी गोद में उठा लिया। दुर्गा की आंखों में डर और घृणा साफ झलक रही थी। वह 21 साल की जवान लड़की थी, जिसकी अनुराग से प्रेम कहानी अभी-अभी टूट चुकी थी। पनिबाई के कहने पर उसने अनुराग को छोड़ दिया था, ताकि अनुराग के बाप के गुंडे उसे न मार दें। राजेश, 40 साल का मर्द, दुर्गा से 19 साल बड़ा, उसे बचाने के नाम पर जबरदस्ती शादी कर ली थी। अब वह अपनी नई दुल्हन को अपने घर ले जा रहा था, जहां सुहागरात का इंतजार कर रहा था।
राजेश ने दुर्गा को बेडरूम में लिटाया। कमरा लाल रंग की लाइटों से सजा था, हवा में अगरबत्ती की खुशबू फैली हुई। दुर्गा ने साड़ी को कसकर पकड़ रखा था, लेकिन राजेश ने बिना देर किए उसके हाथ पकड़ लिए। 'तुम मेरी हो अब, दुर्गा। आज रात मैं तुम्हारी सील तोड़ूंगा,' राजेश ने गरजते हुए कहा। दुर्गा ने विरोध किया, 'नहीं राजेश, मुझे मत छुओ। मैं अनुराग से प्यार करती हूं। ये शादी जबरदस्ती हुई है।'
















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