अनुराग ने अपनी मां द्वारा भेजे गए शादी के उपहारों का एक बड़ा बॉक्स राजेश के घर लाकर दिया। राजेश ने मुस्कुराते हुए उसे ले लिया, लेकिन उसकी आंखों में एक छिपी हुई चमक थी। किचन में दुर्गा चाय बना रही थी, उसके टांगों में राजेश की लगातार चुदाई से तेज दर्द हो रहा था। हर कदम पर उसकी चूत में जलन महसूस हो रही थी, लेकिन वह चुपचाप काम करती रही। अचानक अनुराग को देखते ही दुर्गा का चेहरा उदास हो गया। वे दोनों अब पूरी तरह से अलग हो चुके थे—अनुराग का स्पर्श, उनकी नजदीकी, सब कुछ राजेश के कब्जे में चला गया था। दुर्गा की आंखें नम हो गईं, लेकिन वह कुछ न बोल सकी।




















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