हर्षद ने बेल्ट खोली तो शिवांगी थकी हुई लेकिन संतुष्ट लेटी रही, नंगी ही—उसका बदन पसीने और रस से चिपचिपा। हर्षद ने अपना लंड साफ किया, फिर बेडरूम की तरफ बढ़ा। 'अभी वर्कआउट करना है, बच्चा। तू आराम कर, या जो मन केर।' वो बोला, अलमारी से पजामा निकाला और पहन लिया—सिर्फ नीचे का, ऊपर नंगा, मसल्स चमकते हुए। शिवांगी ने मुस्कुराकर देखा, लेकिन उठी नहीं। बेड पर ही फैली रही, पैर फैलाए।
हर्षद ने बेडरूम में ही जगह साफ की, पुश-अप्स शुरू किए—मजबूत बाजुओं से ऊपर-नीचे। सांसें तेज, लेकिन कंट्रोल्ड। शिवांगी की नजरें उसके बदन पर टिकीं—पसीना टपक रहा था, लंड का आकार पजामे में साफ दिख रहा। उत्तेजना फिर जागी। वो धीरे से हाथ नीचे ले गई, चूत पर रगड़ा—गीली अभी भी। 'हम्म... हर्षद, देखो तो... तुम्हारी मसल्स देखकर फिर गर्म हो गई।' वो बोली, उंगली चूत के होंठों पर फेरते हुए।















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