हर्षद बिस्तर से धीरे-धीरे उठा, उसकी आँखें शिवांगी की नंगी बॉडी पर टिकी हुई थीं, जो चादर पर लेटी हुई थी, उसकी साँसें हल्की-हल्की चल रही थीं। कमरे में सूरज की रोशनी हल्की-हल्की झिलमिलाती हुई थी, और हवा में केक की मीठी खुशबू फैली हुई थी। वह मुस्कुराया, अपनी उँगलियों को हल्के से रगड़ते हुए टेबल की ओर बढ़ा, जहाँ वह चॉकलेट केक रखा था—उसकी क्रीम चमक रही थी, टॉप पर चॉकलेट के छोटे-छोटे टुकड़े बिखरे हुए।
शिवांगी ने आँखें बंद कर लीं, एहसास हो गया कि कुछ रोमांचक होने वाला है। हर्षद ने केक को उठाया, धीरे से बिस्तर के पास लाया, और घुटनों के बल बैठ गया। उसने सबसे पहले चॉकलेट के एक छोटे टुकड़े को उँगलियों से उठाया—गर्माहट से पिघला हुआ, चिपचिपा। वह शिवांगी के ऊपर झुका, अपनी साँसें उसके चेहरे पर महसूस कराते हुए, और धीरे-धीरे उस चॉकलेट को उसके एक बूब पर रगड़ा। चॉकलेट पिघलती हुई फैल गई, उसके गुलाबी निप्पल के चारों ओर चमकदार परत बना दी। शिवांगी की साँस तेज हो गई, लेकिन वह चुप रही, एंजॉय करती हुई।















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