शादी के कुछ दिनों बाद एक रात दुर्गा और राजेश आपस में बातें कर रहे थे। बातें हवेली की पुरानी यादों पर आ गईं, दुर्गा के बचपन की मासूम कहानियों पर। दुर्गा हंसते हुए बोली, 'राजेश जी, याद है ना वो पुराना कुआं? बचपन में मैं अनुराग के साथ वहां खेला करती थी। खेलते-खेलते वो कभी अचानक मेरे गले लग जाता था, जैसे कोई बच्चा हो।'
अनुराग का नाम सुनते ही राजेश का चेहरा लाल हो गया। उसकी आंखों में जलन भड़क उठी। 'अनुराग? फिर से वो हरामी का नाम?' राजेश गरज उठा। गुस्से में उसका हाथ उछला और दुर्गा के गाल पर जोरदार थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ की आवाज कमरे में गूंजी, दुर्गा का सिर घूम गया। उसके गाल पर लाल निशान उभर आया।



















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